ज़िंदगी भर मुझे इस बात की हसरत ही रही दिन गुज़ारूँ तो कोई रात सुहानी आए
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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माज़ी भी है उदास मेरे हाल की तरह ये साल भी गुज़र गया हर साल की तरह
Saqi Amrohvi
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मैं ने आ'साब को पत्थर का बना रक्खा है एक दिल है कि जो बनता नहीं पत्थर जैसा हम फ़क़ीरों को कभी रास न आया वरना हम ने पाया था मुक़द्दर तो सिकंदर जैसा
Saqi Amrohvi
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मैं तुझ को भूल जाऊँ मगर मसअला ये है कैसे कटेगी उम्र तेरी याद के बग़ैर
Saqi Amrohvi
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मैं वो चराग़ हूँ जो आँधियों में रौशन था ख़ुद अपने घर की हवा ने बुझा दिया है मुझे
Saqi Amrohvi
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बिछड़े हुए तो एक ज़माना हुआ मगर वो शख़्स मेरी आँख से ओझल नहीं हुआ
Saqi Amrohvi
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