बिस्तर पे मेरे उस ने खोला है गेसुओं को कमरे में भर गई है ख़ुशबू तरह-तरह की
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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एक रिश्ते को किस की नज़र लग गई हिज्र को फिर हमारी ख़बर लग गई
Rachit Sonkar
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मुझ पर बिछा रही है अपने बदन की चादर मेरे बदन को उस ने बिस्तर बना दिया है
Rachit Sonkar
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ज़िंदगी के मज़े हम से पूछे कोई ज़िंदगी ले रही है हमीं से मज़े
Rachit Sonkar
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तब मज़ा मोहब्बत का मुझ को खुल के आएगा जब उभर के आएगी दिल की चोट जानेमन
Rachit Sonkar
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मैं फ़कत दुख सुनाता हूँ अपना और सब शा'इरी समझते है
Rachit Sonkar
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