बिस्तर पे मेरे उस ने खोला है गेसुओं को कमरे में भर गई है ख़ुशबू तरह-तरह की
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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थोड़ा रोने से ग़म दिल का हल्का हुआ हम को गर्मी में बारिश से राहत मिली
Rachit Sonkar
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तुम मुझे याद अब नहीं आते अब मुझे याद हो गए हो तुम
Rachit Sonkar
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ज़िंदगी के मज़े हम से पूछे कोई ज़िंदगी ले रही है हमीं से मज़े
Rachit Sonkar
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ज़िंदगी भर नहीं मिला मुझ को शख़्स जो ज़िंदगानी था मेरी
Rachit Sonkar
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आप आ ही गए है तो मिल लीजिए वरना यूँँ तो किसी से मैं मिलता नहीं
Rachit Sonkar
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