बोसा तो उस लब-ए-शीरीं से कहाँ मिलता है गालियाँ भी मिलीं हम को तो मिलीं थोड़ी सी
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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मिलने की तरह मुझ सेे वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस सेे मुक़द्दर नहीं मिलता
Naseer Turabi
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ये कहाँ की रीत है जागे कोई सोए कोई रात सब की है तो सब को नींद आनी चाहिए
Madan Mohan Danish
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कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है
Waseem Barelvi
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इश्क़ कहाँ अब पहले वाला होता है इश्क़ से बढ़कर इश्क़ का चर्चा होता है
Shariq Kaifi
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