sherKuch Alfaaz

बोसा तो उस लब-ए-शीरीं से कहाँ मिलता है गालियाँ भी मिलीं हम को तो मिलीं थोड़ी सी

Related Sher

रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है

Tehzeeb Hafi

307 likes

मिलने की तरह मुझ सेे वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस सेे मुक़द्दर नहीं मिलता

Naseer Turabi

74 likes

ये कहाँ की रीत है जागे कोई सोए कोई रात सब की है तो सब को नींद आनी चाहिए

Madan Mohan Danish

73 likes

कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है

Waseem Barelvi

69 likes

इश्क़ कहाँ अब पहले वाला होता है इश्क़ से बढ़कर इश्क़ का चर्चा होता है

Shariq Kaifi

47 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Nizam Rampuri.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Nizam Rampuri's sher.