chaman ke rang-o-bu ne is qadar dhoka diya mujh ko ki main ne shauq-e-gul-bosi mein kanton par zaban rakh di
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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'अख़्तर' गुज़रते लम्हों की आहट पे यूँँ न चौंक इस मातमी जुलूस में इक ज़िंदगी भी है
Akhtar Hoshiyarpuri
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क्या लोग हैं कि दिल की गिरह खोलते नहीं आँखों से देखते हैं मगर बोलते नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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क्या लोग हैं कि दिल की गिरह खोलते नहीं आँखों से देखते हैं मगर बोलते नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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