ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए इश्क़ के मग़्फ़िरत की दुआ कीजिए
Khumar Barabankvi
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इलाही मिरे दोस्त हों ख़ैरियत से ये क्यूँँ घर में पत्थर नहीं आ रहे हैं
Khumar Barabankvi
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दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए सामने आइना रख लिया कीजिए
Khumar Barabankvi
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ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही
Khumar Barabankvi
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हद से बढ़े जो इल्म तो है जहल दोस्तो सब कुछ जो जानते हैं वो कुछ जानते नहीं
Khumar Barabankvi
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