चाँद को देखना तेरी आदत सो तुझे देखना मेरी आदत
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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उस को भुला कर मुझ को ये मालूम हुआ आदत कैसी भी हो छोड़ी जा सकती है
Nadeem Shaad
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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
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वो जो उस की आँखें हैं मुसलसल किताबें हैं
Mohsin Ahmad Khan
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ये मिसरा तेरी मेरी उस मोहब्बत की वज़ाहत है तुझे मुझ से मोहब्बत थी मुझे तुझ से मोहब्बत है
Mohsin Ahmad Khan
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तुम को मर जाने की तमन्ना थी जाओ तुम को दी ज़िंदगी हम ने
Mohsin Ahmad Khan
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ग़लत था या सही था वो मगर अपना कभी था वो
Mohsin Ahmad Khan
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है दर पर कोई, देख लो, देख लो तुम? कहाँ जा रहे हो, कहाँ गुम हो तुम भी
Mohsin Ahmad Khan
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