वो जो उस की आँखें हैं मुसलसल किताबें हैं
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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उम्र ज़ाया' की जिस को पाने में रफ़्ता रफ़्ता उसे भुलाना है
Mohsin Ahmad Khan
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जान हो तो ये भी जान लो तुम मेरी कुछ नहीं, मान लो
Mohsin Ahmad Khan
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ग़लत था या सही था वो मगर अपना कभी था वो
Mohsin Ahmad Khan
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ये मिसरा तेरी मेरी उस मोहब्बत की वज़ाहत है तुझे मुझ से मोहब्बत थी मुझे तुझ से मोहब्बत है
Mohsin Ahmad Khan
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आप को तो चलो मौत ही आएगी मुझ को तो हैं इशारे ही काफ़ी सदा
Mohsin Ahmad Khan
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