आप को तो चलो मौत ही आएगी मुझ को तो हैं इशारे ही काफ़ी सदा
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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ग़लत था या सही था वो मगर अपना कभी था वो
Mohsin Ahmad Khan
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ये मिसरा तेरी मेरी उस मोहब्बत की वज़ाहत है तुझे मुझ से मोहब्बत थी मुझे तुझ से मोहब्बत है
Mohsin Ahmad Khan
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है दर पर कोई, देख लो, देख लो तुम? कहाँ जा रहे हो, कहाँ गुम हो तुम भी
Mohsin Ahmad Khan
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ये सारा जहाँ एक तस्बीह सा है वो जब चाहता है इसे फेरता है
Mohsin Ahmad Khan
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तुम को मर जाने की तमन्ना थी जाओ तुम को दी ज़िंदगी हम ने
Mohsin Ahmad Khan
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