ये सारा जहाँ एक तस्बीह सा है वो जब चाहता है इसे फेरता है
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
Kumar Vishwas
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दो जहाँ की ज़िंदगी जीकर चले हैं दो घड़ी मरते-मरते फिर मुझे कुछ और मरने दीजिए
nakul kumar
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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जहाँ तक मुझ सेे मतलब है जहाँ को वही तक मुझ को पूछा जा रहा है ज़माने पर भरोसा करने वालों भरोसे का ज़माना जा रहा है
Naeem Akhtar Khadimi
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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वो जो उस की आँखें हैं मुसलसल किताबें हैं
Mohsin Ahmad Khan
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ग़लत था या सही था वो मगर अपना कभी था वो
Mohsin Ahmad Khan
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ये मिसरा तेरी मेरी उस मोहब्बत की वज़ाहत है तुझे मुझ से मोहब्बत थी मुझे तुझ से मोहब्बत है
Mohsin Ahmad Khan
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दिल के कूँचे को आबाद कर भूले से, पर मुझे याद कर
Mohsin Ahmad Khan
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आप को तो चलो मौत ही आएगी मुझ को तो हैं इशारे ही काफ़ी सदा
Mohsin Ahmad Khan
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