'dard' ke milne se ai yar bura kyun mana us ko kuchh aur siwa did ke manzur na tha
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
Qaisar-ul-Jafri
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ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है हम तो इस जीने के हाथों मर चले
Khwaja Meer Dard
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बाजी बदी थी उस ने मेरे चश्म-ए-तर के साथ आख़िर को हार हार के बरसात रह गई
Khwaja Meer Dard
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मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े मिरी याद तुझ को दिलाता रहेगा
Khwaja Meer Dard
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तर-दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयो दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें
Khwaja Meer Dard
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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