दर्द को गिनता रहता हूँ शब ओ रोज़ मुद्दतों बा'द कोई काम मिला है मुझ को
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
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तू ने इतनी भी चोटें नहीं खाई हैं 'अख़्तर' दिल किसी और से तू भी तो लगा सकता है
Parwez Akhtar
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तू मुझे फिर ढूंढता रह जाएगा बिनई लिए और इधर ज़िन्दगी के साथ हो जाऊँगा मैं
Parwez Akhtar
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हम पे लानत है कि तेरे पहलू में बैठें हों अगर तुझ को देखें भी नहीं और तुझ को सोचें भी नहीं
Parwez Akhtar
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एक बार बसा लें अगर कुछ अपने दिल में फिर दर्द हो या तू हो निकलने नहीं देंगे
Parwez Akhtar
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मैं अपनी दु'आओं में असर ढूँडता रहा उस में छुपा जो ज़र था वो ज़र ढूँडता रहा नाकामियों में मैं ने गुज़ारी है ज़िन्दगी नाकामियों में अपना हुनर ढूँडता रहा
Parwez Akhtar
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