तू ने इतनी भी चोटें नहीं खाई हैं 'अख़्तर' दिल किसी और से तू भी तो लगा सकता है
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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मैं सोच रहा था कल रात ऐसे रिश्तों में तो जुम्बिश भी नहीं आती वो है तो इंग्लिश में बात करती है और मुझे तो इंग्लिश भी नहीं आती
Parwez Akhtar
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सच बोलने दे ज़ालिम न कर ऐसा सलूक मुझ सेे मेरे ख़्वाब सब हैं टूटे कहीं दिल टूट न जाए
Parwez Akhtar
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हर एक बात पे तेरा रूठ जाना ये इशारा है कि तू मेरा है
Parwez Akhtar
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वो शम्अ' के मानिंद हर वक़्त जलती रहती थी फिर मैं भी अपनी ज़ात का परवाना हो गया
Parwez Akhtar
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अब मुझे कोई गिला नहीं है तुम भी मेरे हो वो भी मेरा सभी से अपना वास्ता है सभी से अपनी दुश्मनी है
Parwez Akhtar
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