वो शम्अ' के मानिंद हर वक़्त जलती रहती थी फिर मैं भी अपनी ज़ात का परवाना हो गया
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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सच बोलने दे ज़ालिम न कर ऐसा सलूक मुझ सेे मेरे ख़्वाब सब हैं टूटे कहीं दिल टूट न जाए
Parwez Akhtar
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तू ने इतनी भी चोटें नहीं खाई हैं 'अख़्तर' दिल किसी और से तू भी तो लगा सकता है
Parwez Akhtar
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मैं अपनी दु'आओं में असर ढूँडता रहा उस में छुपा जो ज़र था वो ज़र ढूँडता रहा नाकामियों में मैं ने गुज़ारी है ज़िन्दगी नाकामियों में अपना हुनर ढूँडता रहा
Parwez Akhtar
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हम को नहीं है कुछ भी ख़बर फिर भी हाँ मगर तेरे बगैर जीना का सोचा, तो रो दिए पूछा जो उस ने रोते हो 'अख़्तर' भला तुम क्यूँ अब बात आई रोने की, सोचा, तो रो दिए
Parwez Akhtar
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एक बार बसा लें अगर कुछ अपने दिल में फिर दर्द हो या तू हो निकलने नहीं देंगे
Parwez Akhtar
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