दौलते दुनिया के पीछे चल रहा है हर बशर हर बशर के पीछे लेकिन है फरिश्ता मौत का
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं
Rahat Indori
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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नुसरत-ए-हक़ देखना आशूर तक ले जाएगी हसरत-ए-दीदार कोह-ए-तूर तक ले जाएगी
''Akbar Rizvi"
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बस ऐसे इलाके को नज़र ढूॅंढ रही है दरिया जहाँ मिलता है समुंदर नहीं मिलता
''Akbar Rizvi"
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देखलें अपना गिरेबाँ जो ज़माने वाले फिर किसी शख़्स पा उँगली न उठाएगा कोई
''Akbar Rizvi"
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किसी परिंद ने थोड़ी उड़ान की ख़ातिर ज़मीर बेच दिया और सुकून बेच दिया
''Akbar Rizvi"
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जिस सेे डरते थे ज़माने के सितमगर सारे आज के दौर का वो मालिक-ए-अश्तर न रहा
''Akbar Rizvi"
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