दिसंबर की सर्दी है उस के ही जैसी ज़रा सा जो छू ले बदन काँपता है
sherKuch Alfaaz
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इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग
Khan Janbaz
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हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
Akbar Allahabadi
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तुम्हारे अंदर छुपी हुई इक हसीन लड़की ज़रा से काजल ज़रा सी लाली से मिल गई है
Vishal Bagh
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मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
Ankit Maurya
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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