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दीवार उठाने की तिजारत नहीं आई दिल्ली में रहे और सियासत नहीं आई बिकने को तो दिल बिक गया बाज़ार में लेकिन जो आप बताते थे वो क़ीमत नहीं आई

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राहों में जान घर में चराग़ों से शान है दीपावली से आज ज़मीन आसमान है

Obaid Azam Azmi

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ख़ुशरंग नज़र आता है जाज़िब नहीं लगता माहौल मेरे दिल से मुख़ातिब नहीं लगता मैं भी नहीं हर शे'र में मौजूद ये सच है ग़ालिब भी हर इक शे'र में ग़ालिब नहीं लगता

Obaid Azam Azmi

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कहाँ से चला था निग़ाहों में क्या था कहाँ जा रहा था मुझे सोचने दो मेरा साज़ क्या था मेरी तर्ज़ क्या थी मैं क्या गा रहा था मुझे सोचने दो

Obaid Azam Azmi

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हर गाम तेरे इश्क़ का इकरार है मैं हूँ ज़ंजीर है ज़ंजीर की झनकार है मैं हूँ ऐ ज़ीस्त जो सब सेे बड़ी फ़नकार है तू है और तुझ सेे बड़ा वो जो अदाकार है मैं हूँ

Obaid Azam Azmi

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दिल जिस का मोहब्बत में गिरफ़्तार रहा है वो मेरी मदद के लिए तैयार रहा है आग़ाज़-ए-मोहब्बत का फ़साना भी था दिलचस्प बर्बादी का क़िस्सा भी मज़ेदार रहा है

Obaid Azam Azmi

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