dekhta main use kyunkar ki naqab uthte hi ban ke diwar khadi ho gai hairat meri
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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लुटाते हैं वो दौलत हुस्न की बावर नहीं आता हमें तो एक बोसा भी बड़ी मुश्किल से मिलता है
Jaleel Manikpuri
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आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही
Jaleel Manikpuri
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आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर
Jaleel Manikpuri
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बहार आई कि दिन होली के आए गुलों में रंग खेला जा रहा है
Jaleel Manikpuri
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मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता है मगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है
Jaleel Manikpuri
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