धमका के बोसे लूँगा रुख़-ए-रश्क-ए-माह का चंदा वसूल होता है साहब दबाव से
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मुंतज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे चाँद को छत पे बुला लूँगा इशारा कर के
Rahat Indori
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तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो तुम ने तोड़ डाला है ये टुकड़े मैं नहीं लूँगा मुझे फिर दिल बना कर दो
Asad Ajmeri
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एक बोसे के तलबगार हैं हम और माँगे तो गुनहगार हैं हम
Unknown
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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा तेरी तस्वीर जलाऊँगा चला जाऊँगा
Shaikh Sohail
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बोसे अपने आरिज़-ए-गुलफ़ाम के ला मुझे दे दे तिरे किस काम के
Muztar Khairabadi
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क़ौम के ग़म में डिनर खाते हैं हुक्काम के साथ रंज लीडर को बहुत है मगर आराम के साथ
Akbar Allahabadi
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इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम वस्ल का दिल से मिरे अरमान रुख़्सत हो गया
Akbar Allahabadi
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कोट और पतलून जब पहना तो मिस्टर बन गया जब कोई तक़रीर की जलसे में लीडर बन गया
Akbar Allahabadi
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मज़हबी बहस मैं ने की ही नहीं फ़ालतू अक़्ल मुझ में थी ही नहीं
Akbar Allahabadi
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हया से सर झुका लेना अदास मुस्कुरा देना हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना
Akbar Allahabadi
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