घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा तेरी तस्वीर जलाऊँगा चला जाऊँगा
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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जलता नहीं हूँ आतिश-ए-रुख़सार देख कर करता हूँ नाज़ ताक़त-ए-दीदार देख कर
Shaikh Sohail
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हर इक अल्फ़ाज़ में बस तू समाएँ वगरना ये सुख़न हम कह न पाएँ कभी इस क़ितआ का मिसरा रहे तू कभी ग़ज़लों में तुझ को हम छुपाएँ
Shaikh Sohail
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दिल को मेरे ख़ुदा अभी ताब-ए-सुख़न नहीं लिखने चला हूँ वस्फ़-ए-रूख़-ए-यार देख कर
Shaikh Sohail
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एजाज़-ए-शायरी कहो अपनी ज़बान से ख़स्ता सोहेल शे'र सुनाओ न तुम कभी
Shaikh Sohail
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अब तक मिला नहीं है कहाँ है सुकून ए दिल ख़ुद को मैं खो दिया हूँ इसे ढूँढ़ते हुए
Shaikh Sohail
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