एजाज़-ए-शायरी कहो अपनी ज़बान से ख़स्ता सोहेल शे'र सुनाओ न तुम कभी
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को
Naseer Turabi
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वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था मैं ने उस के हाथ चू में और बेबस कर दिया
Waseem Barelvi
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तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्या हम तेरे दोस्तों के भी नख़रे उठाएँगे
Ali Zaryoun
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हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही
Dushyant Kumar
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लिख के उँगली से धूल पे कोई ख़ुद हँसा अपनी भूल पे कोई याद कर के किसी के चेहरे को रख गया होंठ फूल पे कोई
Sandeep Thakur
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मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत का तकाज़ा ये है तुझ को चाहा भी तो औक़ात से बढ़ कर चाहा
Shaikh Sohail
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जलता नहीं हूँ आतिश-ए-रुख़सार देख कर करता हूँ नाज़ ताक़त-ए-दीदार देख कर
Shaikh Sohail
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दिल को मेरे ख़ुदा अभी ताब-ए-सुख़न नहीं लिखने चला हूँ वस्फ़-ए-रूख़-ए-यार देख कर
Shaikh Sohail
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हर इक अल्फ़ाज़ में बस तू समाएँ वगरना ये सुख़न हम कह न पाएँ कभी इस क़ितआ का मिसरा रहे तू कभी ग़ज़लों में तुझ को हम छुपाएँ
Shaikh Sohail
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ईद आई वो न आए क्यूँँ कहूँ ये ईद हो ईद के दिन भी न गर उन की मुयस्सर दीद हो
Shaikh Sohail
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