धूप से छाँव की तरफ़ चलना शहर से गाँव की तरफ़ चलना
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तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है
Waseem Barelvi
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नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घू में लेकिन अब घर अच्छा लगता है
Nida Fazli
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जब मुंडेरों से धूप ढलती है तो कमी उस की मुझ को खलती है जो हथेली पे अपनी लिखती थी दोस्ती प्यार में बदलती है
Sandeep Thakur
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अब न मैं वो हूँ न बाकी हैं ज़माने मेरे फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे
Rahat Indori
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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शाहज़ादे पता नहीं तुम को तुम पे कितनी कनीज़ मरती हैं
Arohi Tripathi
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राम लिखने लगी मैं काग़ज़ पर काम आसान हो गए मेरे
Arohi Tripathi
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अपने किए पे तुम हो पशेमान किस लिए इनकार कर रही हो मेरी जान किस लिए
Arohi Tripathi
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दाग़ दामन पर तुम्हारे जब लगे ये न तुम भी देख पाए कब लगे ठीक उस ने तब निशाना तय किया तीर सीने में तुम्हारे जब लगे
Arohi Tripathi
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तुम्हें तो अपने कहे पर भी ए'तिबार नहीं हमारे बा'द तुम्हें भी किसी से प्यार नहीं
Arohi Tripathi
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