दिल मिरा वो घर है सौरभ ख़ुद-कुशी जिस में हुई कम किराए पर भी इस में कौन रहने आएगा
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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आँसुओं को क़ैद रक्खा ग़म ग़ज़ल में बाँधकर ग़म नए मिलते रहे और ये हुनर चलता रहा
sourabh meena
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मेरी ये बात मत कहना किसी से ये कह कर बात सब से कह रहा हूँ
sourabh meena
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भर गए है गाल के गड्ढे भी मेरे आँख से इतनी हुई बरसात इक दिन
sourabh meena
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ख़ुद पर ही हँसने लगता हूँ ये बात सोच कर, कितना किसी के वास्ते रोता रहा हूँ मैं
sourabh meena
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ग़म के ख़ज़ाने से ज़रा मलबा उठा कर देख धोखा दिया जिस ने वो कितना ख़ूब-सूरत था
sourabh meena
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