ख़ुद पर ही हँसने लगता हूँ ये बात सोच कर, कितना किसी के वास्ते रोता रहा हूँ मैं
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मेरी ये बात मत कहना किसी से ये कह कर बात सब से कह रहा हूँ
sourabh meena
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दिल मिरा वो घर है सौरभ ख़ुद-कुशी जिस में हुई कम किराए पर भी इस में कौन रहने आएगा
sourabh meena
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भर गए है गाल के गड्ढे भी मेरे आँख से इतनी हुई बरसात इक दिन
sourabh meena
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आँसुओं को क़ैद रक्खा ग़म ग़ज़ल में बाँधकर ग़म नए मिलते रहे और ये हुनर चलता रहा
sourabh meena
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ग़म के ख़ज़ाने से ज़रा मलबा उठा कर देख धोखा दिया जिस ने वो कितना ख़ूब-सूरत था
sourabh meena
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