दिन में जितनी बार धड़कता है ये दिल उतने बोसे तुझ पर मेरे बनते हैं
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हें गर याद आती थी मुझे ख़त क्यूँ नहीं लिक्खा मिरा नंबर नहीं तो क्या पता तो जानते ही थे
Gaurav Singh
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यूँँ ही हमारा सिलसिला चलता रहे मजीद यूँँ ही हमारे दरमियाँ दूरी बनी रहे
Gaurav Singh
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हम ने अब तक दुनिया को बस इतना जाना सबके अंदर एक दुशासन होता है
Gaurav Singh
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आप सिलवट चाहते हैं बिस्तरे में और हम हैं बिस्तरे की आबरू पर शे'र कहना चाहते हैं
Gaurav Singh
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ऐसे मेरे ग़मों में अकेला हूँ मैं वैसे मेरी कहानी में सौ आदमी
Gaurav Singh
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