यूँँ ही हमारा सिलसिला चलता रहे मजीद यूँँ ही हमारे दरमियाँ दूरी बनी रहे
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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उस के झुमके की बात क्या कीजे उस की बातें भी यार गहना हैं
Gaurav Singh
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मिला के लब से लब को हम हमारी कई सदियों की दूरी तय करेंगे
Gaurav Singh
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तुझे लगता है पीछे काफिला है पलट कर देख दुनिया जा चुकी है
Gaurav Singh
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आप सिलवट चाहते हैं बिस्तरे में और हम हैं बिस्तरे की आबरू पर शे'र कहना चाहते हैं
Gaurav Singh
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दुनिया घूम रही है या'नी मेरे दोस्त कोई तो है जो चाक घुमाता रहता है
Gaurav Singh
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