दो आँखों से दुनिया अब कैसे दिखे हम दो आँखों में दुनिया देखते थे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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वादे तकल्लुफ़ होते हैं 'लेखक' कुछ करना तो कोशिश करना तुम
Lekhak Suyash
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मोहब्बत को इबादत मानता हूँ मैं ख़ुदा इंसाफ़ कर मेरी परस्तिश का
Lekhak Suyash
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मुझ को उदास ही रहने दो अब ख़ुशियों से वहशत सी होती है
Lekhak Suyash
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ख़ुद-कुशी तो होने से रही मौत की दुआ दो यारों अब
Lekhak Suyash
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मरने की चाहतों में भी जीते चले गए घर थे वो बद-नसीब जहाँ बाप नइँ रहे
Lekhak Suyash
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