मरने की चाहतों में भी जीते चले गए घर थे वो बद-नसीब जहाँ बाप नइँ रहे
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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क्या करोगे बुलाकर ख़ुदा को वहाँ हो ज़रूरत अगर ना-ख़ुदा की जहाँ
Lekhak Suyash
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मुझ को उदास ही रहने दो अब ख़ुशियों से वहशत सी होती है
Lekhak Suyash
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मोहब्बत को इबादत मानता हूँ मैं ख़ुदा इंसाफ़ कर मेरी परस्तिश का
Lekhak Suyash
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आसान हुनर था जीते जाना पर आसाँ काम नहीं करता मैं
Lekhak Suyash
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या तो फ़ुर्क़त में निभा अहद-ए-वफ़ा या तो शौक़-ए-जिस्म का इक़रार कर
Lekhak Suyash
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