या तो फ़ुर्क़त में निभा अहद-ए-वफ़ा या तो शौक़-ए-जिस्म का इक़रार कर
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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क्या करोगे बुलाकर ख़ुदा को वहाँ हो ज़रूरत अगर ना-ख़ुदा की जहाँ
Lekhak Suyash
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वादे तकल्लुफ़ होते हैं 'लेखक' कुछ करना तो कोशिश करना तुम
Lekhak Suyash
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ये कार-ए-मुहाल कर लिया है अब ख़ुद को बहाल कर लिया है
Lekhak Suyash
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यूँँ साथ तो न जाने क्या-क्या नहीं चला हमराह पर वही था जो साथ थम सका
Lekhak Suyash
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ग़ैरतों के मसअले थे ख़्वाब हम पर हँस रहे थे
Lekhak Suyash
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