ग़ैरतों के मसअले थे ख़्वाब हम पर हँस रहे थे
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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ये मत भूलो कि ये लम्हात हम को बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं
Jaun Elia
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मुझ को भी उन्हीं में से कोई एक समझ ले कुछ मसअले होते हैं ना जो हल नहीं होते
Ali Zaryoun
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यार बिछड़ कर तुम ने हँसता बसता घर वीरान किया मुझ को भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया
Ali Zaryoun
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उस के होंटों पे रख के होंट अपने बात ही हम तमाम कर रहे हैं
Jaun Elia
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वादे तकल्लुफ़ होते हैं 'लेखक' कुछ करना तो कोशिश करना तुम
Lekhak Suyash
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तुम बहारों में पले हो मैं ख़िज़ाँओं का ख़ुदा हूँ
Lekhak Suyash
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मुझ को उदास ही रहने दो अब ख़ुशियों से वहशत सी होती है
Lekhak Suyash
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मरने की चाहतों में भी जीते चले गए घर थे वो बद-नसीब जहाँ बाप नइँ रहे
Lekhak Suyash
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यूँँ साथ तो न जाने क्या-क्या नहीं चला हमराह पर वही था जो साथ थम सका
Lekhak Suyash
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