दुनिया के भरम को कुछ यूँँ तोड़ दिया मैं ने इस बार नसीबों का रुख़ मोड़ दिया मैं ने
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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हाल न पूछो मोहन का सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था मैं ने उस के हाथ चू में और बेबस कर दिया
Waseem Barelvi
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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हासिल न कर पाया तुझे मैं मिन्नतों के बा'द भी उम्मीद सेंटा से लगाना लाज़मी भी है मिरा
Harsh saxena
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'हर्ष' वस्ल में जितनी मर्ज़ी शे'र कह लो तुम हिज्र के बिना इन में जान आ नहीं सकती
Harsh saxena
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हम ने सँभाल रक्खे हैं अपनी तिज़ोरी में उस के दिए वो तोहफ़े नहीं हैं ख़ज़ाने हैं
Harsh saxena
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हमें इस मिट्टी से कुछ यूँँ मुहब्बत है यहीं पे निकले दम दिल की ये हसरत है हमें क्यूँ चाह उस दुनिया की हो मौला हमारी तो इसी मिट्टी में जन्नत है
Harsh saxena
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रंग सारे फीके फीके ही लगेंगे मुझ को अब उन की आँखों का जो काला सुर्मा देखा है अभी
Harsh saxena
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