दुश्मनी मुल्कों की ही मासूमियत है खा गईं वहशतें ही इस वजह से ज़ेहन पर हैं छा गईं
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
Bashir Badr
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
Meer Taqi Meer
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आज पहली दफ़ा लगा मुझ को वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को बस बिना बात ही बिगड़ता था बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को
Sandeep Thakur
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मुद्दतें हो गईं बिछड़े हुए तुम से लेकिन आज तक दिल से मिरे याद तुम्हारी न गई
Akhtar Shirani
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रूह के ज़ख़्म की सब दवा मिल गई जब मोहब्बत की तेरे हवा मिल गई
Manish
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तेरे माथे को चूमूँ मैं मुहब्बत भर के देखूँ हवस से ख़ाली होकर रूह के ग़म हर के देखूँ
Manish
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मुहब्बत इबादत है ख़ुदा की इनायत है मुझे जाॅं से भी प्यारी तू और ये रफ़ाक़त है
Manish
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परस्तिश नेक हो मंदिर अज़ानों से बरसती हैं दुआएँ आसमानों से
Manish
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मोहब्बत की हिरासत से ज़मानत चाहता हूँ परिंदा हूँ उड़ानों की इजाज़त चाहता हूँ तू मेरे हौसलों में जान भर देना ज़रा सी दु'आओं में ख़ुदा इतनी इनायत चाहता हूँ
Manish
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