मुद्दतें हो गईं बिछड़े हुए तुम से लेकिन आज तक दिल से मिरे याद तुम्हारी न गई
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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कुछ इस तरह से याद आते रहे हो कि अब भूल जाने को जी चाहता है
Akhtar Shirani
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मुझे है ए'तिबार-ए-वादा लेकिन तुम्हें ख़ुद ए'तिबार आए न आए
Akhtar Shirani
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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या
Akhtar Shirani
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माना कि सब के सामने मिलने से है हिजाब लेकिन वो ख़्वाब में भी न आएँ तो क्या करें
Akhtar Shirani
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इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है
Akhtar Shirani
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