कुछ इस तरह से याद आते रहे हो कि अब भूल जाने को जी चाहता है
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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मुझे है ए'तिबार-ए-वादा लेकिन तुम्हें ख़ुद ए'तिबार आए न आए
Akhtar Shirani
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माना कि सब के सामने मिलने से है हिजाब लेकिन वो ख़्वाब में भी न आएँ तो क्या करें
Akhtar Shirani
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इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है
Akhtar Shirani
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दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी 'अख़्तर' वो बे-ख़ुदी के ज़माने किधर गए
Akhtar Shirani
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पलट सी गई है ज़माने की काया नया साल आया नया साल आया
Akhtar Shirani
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