एक दिन मेरी ख़ामुशी ने मुझे लफ़्ज़ की ओट से इशारा किया
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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किस शफ़क़त में गुँधे हुए मौला माँ बाप दिए कैसी प्यारी रूहों को मेरी औलाद किया
Anjum Saleemi
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सब के शानों पे एक चेहरा था जिन पे सूरत बनी हुई थी मेरी
Anjum Saleemi
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मैं चीख़ता रहा कुछ और भी है मेरा इलाज मगर ये लोग तुम्हारा ही नाम लेते रहे
Anjum Saleemi
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मुझे पता है कि बर्बाद हो चुका हूँ मैं तू मेरा सोग मना मुझ को सोगवार न कर
Anjum Saleemi
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उठाए फिरता रहा मैं बहुत मोहब्बत को फिर एक दिन यूँँही सोचा ये क्या मुसीबत है
Anjum Saleemi
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