एक ग़ज़ल से जिस की मूरत मैं ने आज बनाई है एक दफ़ा जो वो पढ़ ले तो प्राण प्रतिष्ठा हो जाए
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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जो साँसों को गिनते गिनते जीता है उस की मौत ज़रा जल्दी आ जाती है
Tanoj Dadhich
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बहुत हैरान हैं हम भी तुम्हारे बिन बना दिया किसी की मुस्कुराहट ने हमारा दिन बना दिया
Tanoj Dadhich
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ज़िन्दगी पर लिख दिया था नाम मैं ने राम का और फिर दुख के समुंदर पार सारे हो गए
Tanoj Dadhich
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इस क़दर हम ख़ुश रखेंगे आप को ससुराल में आप को महसूस होगा जी रहे ननिहाल में दो गुलाबों की तरह है दो चमेली की तरह फ़र्क़ बस इतना तुम्हारे होंठ में और गाल में
Tanoj Dadhich
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अब उस के हाथ पीले हो गए हैं नहीं पीछे पड़ेगी हाथ धो कर
Tanoj Dadhich
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