एक ही बात मुझ में अच्छी है और मैं बस वही नहीं करता
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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नज़र से तुम को मिले न कोई सुराग़ दिल का झुका के गर्दन बुझा लिया है चराग़ दिल का सुनूँ न कैसे करूँँ न क्यूँँकर मैं अपने दिल की मेरे अलावा है कौन इस बद-दिमाग़ दिल का
Ammar Iqbal
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दिल आज शाम से ही उसे ढूँडने लगा कल जिस के बा'द कमरे में तन्हाई आई थी
Ammar Iqbal
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ख़ुद ही जाने लगे थे और ख़ुद ही रास्ता रोक कर खड़े हुए हैं
Ammar Iqbal
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एक दरवेश को तिरी ख़ातिर सारी बस्ती से इश्क़ हो गया है
Ammar Iqbal
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मैं ने तस्वीर फेंक दी है मगर कील दीवार में गड़ी हुई है
Ammar Iqbal
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