मैं ने तस्वीर फेंक दी है मगर कील दीवार में गड़ी हुई है
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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दिल आज शाम से ही उसे ढूँडने लगा कल जिस के बा'द कमरे में तन्हाई आई थी
Ammar Iqbal
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कैसा मुझ को बना दिया 'अम्मार' कौन सा रंग भर गए मुझ में
Ammar Iqbal
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इसी फ़कीर की गफ़लत से आगही ली है मेरे चराग़ से सूरज ने रौशनी ली है गली-गली में भटकता है शोर करता हुआ हमारे इश्क़ ने सस्ती शराब पी ली है
Ammar Iqbal
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नज़र से तुम को मिले न कोई सुराग़ दिल का झुका के गर्दन बुझा लिया है चराग़ दिल का सुनूँ न कैसे करूँँ न क्यूँँकर मैं अपने दिल की मेरे अलावा है कौन इस बद-दिमाग़ दिल का
Ammar Iqbal
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कैसे कैसे बना दिए चेहरे अपनी बे-चेहरगी बनाते हुए
Ammar Iqbal
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