कैसा मुझ को बना दिया 'अम्मार' कौन सा रंग भर गए मुझ में
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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किस ने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर हैं बाहर कौन है
Rahat Indori
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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दिल आज शाम से ही उसे ढूँडने लगा कल जिस के बा'द कमरे में तन्हाई आई थी
Ammar Iqbal
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नज़र से तुम को मिले न कोई सुराग़ दिल का झुका के गर्दन बुझा लिया है चराग़ दिल का सुनूँ न कैसे करूँँ न क्यूँँकर मैं अपने दिल की मेरे अलावा है कौन इस बद-दिमाग़ दिल का
Ammar Iqbal
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मैं ने तस्वीर फेंक दी है मगर कील दीवार में गड़ी हुई है
Ammar Iqbal
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कैसे कैसे बना दिए चेहरे अपनी बे-चेहरगी बनाते हुए
Ammar Iqbal
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ख़ुद ही जाने लगे थे और ख़ुद ही रास्ता रोक कर खड़े हुए हैं
Ammar Iqbal
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