sherKuch Alfaaz

एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं यह दो पंक्तियाँ मन की उलझन दिखाती हैं: याद न आना और भूल जाना एक बात नहीं। बोलने वाला कहता है कि लंबे समय से खयाल नहीं आया, फिर भी मन के अंदर का लगाव खत्म नहीं हुआ। दूरी और चुप्पी के बीच भी प्यार की हल्की मौजूदगी बनी रहती है।

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