एक ज़िद्दी लड़का हासिल आपगा को कर रहा और घूरता भी जा रहा है उस फ़लक को ग़ौर से अब
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
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मुझ को भी ऐसी आँख अता कर मेरे ख़ुदा अंधा हो कर भी मुझ को ये नज़्ज़ारगी मिले
Vikas Shah musafir
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पता है तुम को उस दिन क्या हुआ था किसी ने तोड़ डाला था मेरा दिल
Vikas Shah musafir
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आपसे मिल कर मुझे अच्छा लगा पर आप से थोड़ा अभी शर्मा रहा हूँ
Vikas Shah musafir
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तुम कभी नहीं आना चाहती हो मेरे घर दुख कभी नहीं होता गर मिला नहीं होता
Vikas Shah musafir
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जो मरजाते हैं मरते थोड़ी हैं वो तो बस बच जाते हैं जीने से अब वो बात नहीं है इस दारू में अब बस कड़वी लगती है पीने से
Vikas Shah musafir
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