फँस गई हैं गेसुओं में आप के आप मेरी उँगलियाँ सुलझाइए
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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ज़रा सा ख़यालों में क्या खो गए हम ख़यालों ने हम को हक़ीक़त दिखा दी
Rachit Sonkar
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ज़िंदगी के मज़े हम से पूछे कोई ज़िंदगी ले रही है हमीं से मज़े
Rachit Sonkar
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तुम मुझे याद अब नहीं आते अब मुझे याद हो गए हो तुम
Rachit Sonkar
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हम को तुम्हारी बातें अच्छी नहीं लगी हैं आगे से हम सेे थोड़ा इज़्ज़त से बात करना
Rachit Sonkar
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जिए जा रहे हैं दवा के सहारे दिया जल रहा है हवा के सहारे
Rachit Sonkar
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