फर्ज़ ओ सुन्नत तो पहले अदा कीजिए फिर ये कहना के मौला अता कीजिए
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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कोई मेरा साथी बन जाए अंधे की लाठी बन जाए मात पिता को ऐसे पूजो सारा घर काशी बन जाए
Ashok Sagar
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तेरी घड़ी का क़ुसूर क्या जब समय ही मेरा ख़राब है तो
Ashok Sagar
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कहना उन सेे मैं याद करता हूँ वो कहीं पर अगर मिलें तुम को
Ashok Sagar
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क्या गुरबत के क़िस्से भी छपते हैं अख़बारों में हम ने साँसों को भी बिकते देखा है गुब्बारों में
Ashok Sagar
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नहीं जानते हो तो जा कर के पूछो कुल्हाड़ी बताएगी लकड़ी की क़ीमत
Ashok Sagar
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