फ़ज़्ल या मौला ऐसा करो बंदे को फिर से बंदा करो
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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पूरी नहीं हो पाती है कोई ग़ज़ल मिरी मैं नाम तेरा लिखके क़लम तोड़ देता हूँ
Paras Angral
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ग़र ये तमाशा शहर में यूँँ ही लगा रहे कुछ देर देख कर कहूँ अब छोड़ देता हूँ
Paras Angral
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मैं इसी सम्त ही तो बैठा हूँ तेरी जिस सम्त वापसी होगी
Paras Angral
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जब कोई देख न पाएगा मुझे दुनिया में तेरी आँखों में दिखूँगा कोई जब देखेगा
Paras Angral
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गर न मेरी आँखें होती क्या मुझे फिर पैसा दिखता
Paras Angral
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