पूरी नहीं हो पाती है कोई ग़ज़ल मिरी मैं नाम तेरा लिखके क़लम तोड़ देता हूँ
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मैं इसी सम्त ही तो बैठा हूँ तेरी जिस सम्त वापसी होगी
Paras Angral
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गर न मेरी आँखें होती क्या मुझे फिर पैसा दिखता
Paras Angral
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जब कोई देख न पाएगा मुझे दुनिया में तेरी आँखों में दिखूँगा कोई जब देखेगा
Paras Angral
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फ़ज़्ल या मौला ऐसा करो बंदे को फिर से बंदा करो
Paras Angral
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ग़र ये तमाशा शहर में यूँँ ही लगा रहे कुछ देर देख कर कहूँ अब छोड़ देता हूँ
Paras Angral
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