फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया
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उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है
Asrar Ul Haq Majaz
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मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो तुम्हें क्या ख़ुद मुझे भी ग़म नहीं है
Asrar Ul Haq Majaz
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ये आना कोई आना है कि बस रस्मन चले आए ये मिलना ख़ाक मिलना है कि दिल से दिल नहीं मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा इश्क़ तो रुस्वा हो ही चुका है हुस्न भी क्या रुस्वा होगा
Asrar Ul Haq Majaz
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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर
Asrar Ul Haq Majaz
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