गले मिली कभी उर्दू जहाँ पे हिन्दी से मिरे मिज़ाज में उस अंजुमन की ख़ुशबू है
sherKuch Alfaaz
Satish Shukla Raqeeb27 Likes
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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दिल्ली से हम ही बोला करें अम्न की बोली यारो तुम भी कभी लाहौर से बोलो
Rahat Indori
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ख़ूब-सूरत ये मोहब्बत में सज़ा दी उस ने फिर गले मिल के मेरी उम्र बढ़ा दी उस ने
Manzar Bhopali
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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