गले मिलो तो ये भी ध्यान रखना अब 'साहिर' हर इक से रस्म-ए-मुहब्बत नहीं निभाते हैं
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तेरी ख़ुशबू को क़ैद में रखना इत्रदानों के बस की बात नहीं
Fahmi Badayuni
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते हैं कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई?
Umair Najmi
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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ग़म है उलझन है तन्हाई है इस सेे अच्छा तो मर ही जाते
Sahir banarasi
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रात हिज्र में गई तो दिन शराब में गया इश्क़ के ये रंग भी बड़े कमाल होते हैं
Sahir banarasi
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गीत कोई नया गाओ यारों आग सीने में जलाओ यारों ये नया खूँ न कभी भी बहके इस को गाँधी से मिलाओ यारों
Sahir banarasi
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बा'द में तुम को बताएँगे ग़म आज बस हम को तो पी लेने दो
Sahir banarasi
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कोहकन सा मर जाता बात सुन के तो 'साहिर' तुझ को क्यूँ ज़रूरत है फिर कोई जुदाई की
Sahir banarasi
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