कोहकन सा मर जाता बात सुन के तो 'साहिर' तुझ को क्यूँ ज़रूरत है फिर कोई जुदाई की
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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सोचता हूँ चूम लूँ उन हाथों को दुनिया में जो शा'इरी ज़िंदा रखें
Sahir banarasi
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रात हिज्र में गई तो दिन शराब में गया इश्क़ के ये रंग भी बड़े कमाल होते हैं
Sahir banarasi
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मैं ने ख़ुदा क्या माँगा था तुझ सेे ख़ुदा ही बस फिर क्यूँ मुझे कर ख़ुद से दिया यूँँ जुदा ही बस
Sahir banarasi
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रगों में दौड़ता है खूँ की तरह हिंदुस्ताँ हर इक को मिलता नहीं ये नसीब अब साहिर
Sahir banarasi
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तहय्युर भी न होते हैं अदा-ए-ज़िंदगी से हम फ़ना ही हो गए हैं अब ख़ुदा इस आशिक़ी से हम
Sahir banarasi
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