रात हिज्र में गई तो दिन शराब में गया इश्क़ के ये रंग भी बड़े कमाल होते हैं
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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मैं ज़िन्दगी में आज पहली बार घर नहीं गया मगर तमाम रात दिल से माँ का डर नहीं गया बस एक दुख जो मेरे दिल से उम्र भर न जाएगा उस को किसी के साथ देख कर मैं मर नहीं गया
Tehzeeb Hafi
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सोचता हूँ चूम लूँ उन हाथों को दुनिया में जो शा'इरी ज़िंदा रखें
Sahir banarasi
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मैं ने ख़ुदा क्या माँगा था तुझ सेे ख़ुदा ही बस फिर क्यूँ मुझे कर ख़ुद से दिया यूँँ जुदा ही बस
Sahir banarasi
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इस तरफ़ लोग हैं उस ओर भी होंगे 'साहिर' देखो ये जंग में इंसान न मारा जाए
Sahir banarasi
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जिसे लोग कहते मुहब्बत है ज़ालिम बड़ी ये मुहब्बत
Sahir banarasi
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हिंदू ये मुसलमान ये किस ने है बनाया क्या जाने ख़ुदा तेरे खु़दी में था समाया
Sahir banarasi
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