घर मेरा जैसे मंदिर था उन के साथ बुलबुल अब उन के बा'द घर मय-ख़ाना बना रखा है
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
Adeem Hashmi
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भेज देता हूँ मगर पहले बता दूँ तुझ को मुझ से मिलता नहीं कोई मिरी तस्वीर के बा'द
Umair Najmi
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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गर टूटे कोई तारा तो माँगे तुझ को हम इस इंतिज़ार में दस रातें छत पे बीती है
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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उस अल्हड़ लड़की की पहली मोहब्बत था मैं सो मुझ सेे उस का दिल नहीं भरोसा टूटा
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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वो इक याद सोने नहीं देती यारों सुनो यार इक आध सिगरेट लाओ
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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उस के बग़ैर कैसे काटें तवील ये शब प्यारे सुनो मेरी इक सिगरेट ही जलाओ
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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आते हुए मिले भी थे तुम किसी से,बोलो सचमुच नहीं तो ख़ुद को बे-पैरहन दिखाओ
Satyam Bhaskar "Bulbul"
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